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Family Story

असमिका पाण्डेय

उदय ने डर को आत्मविश्वास में बदला: हमारी बेटी के टाइप 1 डायबिटीज़ सफर में एक परिवार जैसा साथ

असमिका पाण्डेय gallery

Story overview

These stories reflect the everyday courage, care, and community that shape UDAI’s work across Uttarakhand.

Rooted in lived experience
Celebrates resilience and hope
Showcases the strength of community

Full story

जब हमारी बेटी को टाइप 1 डायबिटीज़ का पता चला, तो ऐसा लगा जैसे हमारे पैरों तले ज़मीन खिसक गई हो। हमें कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि आगे क्या करें।

फिर हम उदय से जुड़े। वहाँ डॉ. आशीष सर ने हमें बहुत सरल तरीके से समझाया कि इंसुलिन कैसे लगानी है, ब्लड शुगर कैसे संभालनी है और बच्चे की देखभाल कैसे करनी है। उनकी बातों से हमारा डर धीरे-धीरे कम होने लगा।

वहीं हमारी मुलाकात रेखा मैम से भी हुई। उन्होंने हमें बहुत प्यार और धैर्य से हर बात समझाई। जब भी कोई सवाल होता, वे हमेशा मुस्कुराकर हमारी मदद करती थीं। उनके अपनेपन ने हमें कभी अकेला महसूस नहीं होने दिया।

उदय से जुड़कर हमें ऐसे कई परिवार मिले जिनके छोटे-छोटे बच्चे भी टाइप 1 डायबिटीज़ के साथ अच्छी और सामान्य ज़िंदगी जी रहे हैं। उन्हें देखकर हमें हिम्मत और उम्मीद मिली।

आज हम पहले से कहीं ज़्यादा आत्मविश्वास के साथ अपनी बेटी की देखभाल कर पा रहे हैं। हमारे लिए उदय सिर्फ़ एक संस्था नहीं, बल्कि एक परिवार है जिसने मुश्किल समय में हमारा साथ दिया।

इस Journey में सबसे बड़ा बदलाव यह हुआ कि हम अब डर की जगह समझ, धैर्य और Hope के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

हमारी कहानी सिर्फ़ एक परिवार की नहीं, बल्कि उन कई परिवारों की भी है जो कठिन समय में साथ देने वाली एक सच्ची Community पा रहे हैं।

UDAI ने हमें यही सिखाया कि किसी भी बीमारी के साथ जीना संभव है, बस सही जानकारी, सही लोगों और सही सपोर्ट की जरूरत होती है।

आज हमारी बेटी की पढ़ाई, खेल और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में भी हम आत्मविश्वास के साथ शामिल हो रहे हैं।

हमने महसूस किया कि मदद सिर्फ़ दवाइयों या सलाह तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह एक ऐसा सामाजिक सहारा है जो मन को भी संभालता है।